चुनावी विश्लेषज्ञ उज्ज्वल त्यागी से गत दिनों द सेकुलर इण्डिया ने साक्षात्कार किया और हालही में उत्तरप्रदेश में हुए त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के परिणामों को लेकर चर्चा की। उज्ज्वल का मानना है के भाजपा को अपनी रणनीति बदलने पर विचार करना होगा। कोई भी पार्टी एक ही रणनीति के साथ हर राज्य का चुनाव नही लड़ सकती हर क्षेत्र के अपने अलग मुद्दे अलग जातीय समीकरण होते है आप उन्हें नजरंदाज नही कर सकते। प्रस्तुत है उज्ज्वल त्यागी से बातचीत के कुछ प्रमुख अंश।

प्रशन :- क्या पंचायत चुनाव के नतीजों का असर 2022 विधानसभा चुनाव पर भी देखने को मिलेगा।

उत्तर :- आमतौर पर पंचायत चुनाव क्षेत्रीय मुद्दों पर ज्यादा लड़ा जाता है वही दूसरी तरफ प्रदेश स्तर पर समीकरण बदल जाते है पर हाँ पंचायत चुनाव का असर आगामी विधानसभा के चुनावों में भी देखने को मिलेगा। मौजूद हालातो ने खासकर किसान आंदोलन और कोरोना काल मे चरमराई व्यवस्था से मतदाता काफ़ी नाराज़ है। जिसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना भी पड़ा है।

प्रशन :- भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले पश्चिमी क्षेत्र में ही पार्टी जीत नही पाई उस पर आप कहेंगे।

उत्तर :- बिल्कुल अगर आप ग़ाज़ियाबाद को ही देखे जहा पांचो विधायक भाजपा के है वहा 14 में से 12 सीटों पर पार्टी ने कैंडिडेट उतारे जिसमे से मात्र दो ही जीत पाए। वही दूसरी और मेरठ में भी उन्हें निराश ही हाथ लगी दोनों ही जिले भाजपा का गढ़ कहे जाते है। इसका एक बड़ा कारण कार्यकर्ता कि अनदेखी भी रही। इतना ही नही एक जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी पर पैसे लेकर टिकट देना का आरोप भी लगा जिससे कार्यकर्ताओं में काफी निराशा रही। भाजपा मुख्य रूप से कैडर बेस्ड पार्टी है कार्यकर्ताओ में मनोबल नही होने के कारण कैंपेन भी सही तरह से नही हो पाया।

प्रशन :- क्या कोविड के बढ़ते मामलों के बीच चुनाव करवाना सही फैसला था।

उत्तत :- सिर्फ़ उत्तर प्रदेश नही बल्कि अन्य पांच राज्यों
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, पुडुचेरी में भी चुनाव करना सही फैसला नही था। ख़ासकर उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बात करू तो चुनाव के बाद से ही गांवों में कोरोना तेजी से फैल रहा है जो सरकारी आकड़ो में दर्ज नही है। चुनाव में ड्यूटी करने वाले लगभग एक हज़ार से ऊपर शिक्षकों कि जान जा चुकी है। हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में रहते है जहां एक एक जान का महत्व है वहा इन हज़ारो शिक्षकों कि मृत्यु का जिम्मेदार कौन है।

प्रशन :- आपके विश्लेषण के अनुसार भाजपा कि हार के मुख्य कारण क्या है।

उत्तर :- कार्यकर्ताओं कि पदाधिकारियों से नाराजगी साथ ही स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी भाजपा कि हार के दो बड़े कारण रहे दरअसल पार्टी ने अपने देहात की राजनीति में अच्छी पकड़ रखने वाले दिग्गज नेताओं जैसे पूर्व सांसद रमेश चंद्र तोमर , पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी, पार्षद राजेंद्र त्यागी, पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा को पूरे चुनाव में दरकिनार कर के रखा जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना भी पड़ा।

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