मध्यप्रदेश में 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज़ हैं। सितंबर में होने वाले उपचुनावों को लेकर दोनों ही पार्टीयों ने क़मर कस ली हैं। पर तमाम सियासी उठापटक के बीच सभी की निगाहें इंदौर ज़िले कि सांवेर विधानसभा सीट पर टिकी हैं। क्योंकि मध्य प्रदेश की राजनीति के दो दिग्गज यहां से चुनावी मैदान में आमने-सामने है सांवेर मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी विधानसभा भी हैं।

सांवेर विधानसभा में भाजपा की ओर से तुलसीराम सिलावट तो वही कांग्रेस की तरफ से प्रेमचंद गुड्डू मैदान में हैं। दोनो ही राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। दोनों की सांवेर के जनता के बीच अच्छी पकड़ है। बता दे कि सिलावट 4 बार सांवेर से विधायक रह चुके है और वे अभी शिवराज सरकार में मंत्री है। सिलावट 1985 में सांवेर से पहली बार विधायक चुने गए थे।तो वही दुसरी तरफ प्रेम चन्द गुड्डू 1998 में पहली बार सांवेर से चुनाव जीता था। दिलचस्प बात यह है के दोनो कभी एक ही पार्टी में हुआ करते थे। उज्जैन से सांसद रहे प्रेमचंद गुड्डू 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद 2018 में अपने बेटे के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे।

तो दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में मंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर तुलसीराम सिलावट 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। जिससे प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिर गयी और राज्य में पुनः शिवराज के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी और तुलसी सिलावट को शिवराज कैबिनट में जगह मिली।

दोनों राजनेताओं के पाला बदलने ने सांवेर की जनता को कही ना कही असमंजस की स्थिति में ला दिया है। सांवेर के रहने वाले राजेन्द्र परमार ने बताया के आने वाले उपचुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दों का भी थोड़ा बहुत प्रभाव रहेगा। राम मंदिर सीएए जैसे मुद्दों पर सांवेर की जनता वोट कर सकती हैं।

इस बार सांवेर विधानसभा सभा पर सभी की नजर इसलिए भी रहेगी क्योंकि पिछले तमाम चुनावों में देखा यहाँ जीत-हार का अंतर बेहद कम रहता है।क्यों कि अमूमन यहाँ सीधा मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी में में ना होकर स्थानीय नेतृत्व में होता रहा है। जहाँ एक ओर कांग्रेस के तुलसी सिलावट होते थे तो बीजेपी की तरफ से सोनकर परिवार होता रहा है। मगर अब समीकरण बदल चुके है। सांवेर में 1977 के बाद यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की ओर से सोनकर परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा।

इस सीट की विशेषता यह भी है कि यहां से अधिकतर बाहरी प्रत्याशी ही विजयी हुए हैं। सांवेर विधानसभा क्षेत्र में संघ परिवार का काफी प्रभाव है।सांवेर अनुसूचित जाति सुरक्षित सीट पर दलितों और खाती समाज के लगभग बराबर मतदाता हैं। जबकि कलोता राजपूत और धाकड़ समाज की भी पर्याप्त संख्या यहां है। दलितों में करीब 70 फ़ीसदी मतदाता बलाई समाज के हैं। जबकि भाजपा की ओर से संभावित उम्मीदवार तुलसीराम सिलावट खटीक समाज के हैं और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार प्रेमचंद गुड्डू पासी दलित समाज के हैं। सोनकर परिवार भी खटीक समाज में ही आता है। इस सीट पर करीब 40 हजार मतदाता दलित हैं, जबकि करीब 35 हजार मतदाता खाती समाज के और 30 हजार मतदाता कलोता राजपूत समाज के माने जाते हैं। जबकि राजपूत और धाकड़ समाज के 15 -15 हजार वोट है।

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