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सत्ता परिवर्तन की आग राजस्थान में एक बार फिर से सियासी संग्राम शुरू कर दिया है। ताजा मामला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट आमने-सामने आ गए हैं. तो वही डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित 18-20 कांग्रेस और निर्दलीय विधायक दिल्ली पहुंचे थे. बोला तो ये जा रहा है कि अशोक गहलोत सरकार से नाराज चल रहे कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर अपनी बात रखी है. वहीं सीएम अशोक गहलोत ने देर रात कैबिनेट मंत्रियों की मीटिंग ली है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इस सूचना के बाद से सक्रिय हो गए हैं. उन्होंने बीजेपी पे आरोप लगाया है कि राज्य में सरकार गिराने की साजिश चल रही है. दरअसल, राजस्थान में सरकार गिराने की साजिश और विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की ओर से केस दर्ज किए जाने के एक दिन बाद शनिवार को सियासी घटनाक्रम तेजी से पलटा.

राजनीतिक गलियारों में तो चर्चा गर्म है, की राजस्थान में अब कुछ वैसी ही स्थिति बनती दिख रही है, जैसे मध्यप्रदेश हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तमाम विधायक पहले देश के अलग अलग शहरों के एक रिसोर्ट में ठहरे थे, और फिर बाद में पूरी सियासत ही बदल गयी।

आपको बता दे की सचिन पायलट और अशोक गहलोत में तनातनी नई नही हैं इनकी शुरुआत तभी हो गई थी, जब विधानसभा चुनाव जीतकर कांग्रेस पार्टी दिसंबर 2018 में राजस्थान में सत्ता 5 साल बाद वापस आयी थी। कांग्रेस पार्टी द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए विधायक दल नेता के चुनाव से इसकी शुरुआत हो चुकी थी और जब कांग्रेस आलाकमान ने जीत के बादमुख्यमंत्री पद पे तीसरी बार अशोक गहलोत को बैठाया तो यह दरार और ज्यादा गहरी हो गयी।

इसकी मुख्य वजह ये थी कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा पूर्ण रूप से नकारे जाने के बाद राज्य में कांग्रेस पार्टी को फिर से मजबूत करने में सचिन पायलट ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अहम भूमिका निभायी थी। स्वयं राहुल गांधी ने एक सभा मे पायलट को इसका श्रेय दिया था।

राज्य में मंत्री पद आवंटन को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच उभरी नाराजगी देखी गई थी। दोनों ही अपने अपने समर्थकों को को सरकार में अहम मंत्रालय दिलवाना चाहते थे।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा अपने बेटे वैभव को जोधपुर से लोकसभा प्रत्याशी बनाना इन दोनों नेताओं की तनातनी का अगला चैप्टर था। यह मामला मीडिया में जमकर उछाला गया था। लोकसभा चुनाव के बाद पायलट खेमे ने आरोप लगाया था कि अशोक गहलोत का पूरा ध्यान बेटे की सीट जोधपुर पर ही लगा रहा और उन्होंने बाकी जगह पर मुश्किल से प्रचार किया। तो दूसरी ओर गहलोत समर्थको ने सचिन पायलट पे आरोप लगाया कि उन्होंने अशोक गहलोत से अपनी आपसी रंजिश के चलते पार्टी को जोधपुर में हरवाया हैं।

साथ ही इनके दिनों के बीच नगर पालिका चुनावों में भी मेयर पद के उम्मीदवारों के चयन और कोटा के अस्पताल में हुए नवजात बच्चों की मौत के मुद्दे पर सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच के मतभेद खुलकर सामने आए। बच्चों की मौत पर जहां अशोक गहलोत ने इसके लिए पूर्व की सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वहीं सचिन पायलट ने इसे सीधा राज्य सरकार की जिम्मेदारी बताया था और गहलोत पे मामले पे लीपा पोती का आरोप लगाया था।

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