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राजस्थान में जारी सियासी उठापटक थमने का नाम नही ले रहीं हैं। विधायक दल की बैठक में शामिल नही होने के कारण सचिन पायलट समेत उनके कुछ साथी विधायकों को उपमुख्यमंत्री और मंत्री के पदों से बर्खास्त कर दिया गया। वही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पायलट और उनके समर्थक 18 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विधायकों को नोटिस भी भेज दिया है।

विधायक दल की बैठक खत्म होने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने राज्यपाल से मिलकर उन्हें सूबे के मौजूद राजनीतिक हालातों के बारे में बताया साथ बहुमत होने का दावा भी किया। गौरतलब है कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को एक रिसोर्ट में रखा हुआ हैं जिस कारण अब सवाल उठने लगे हैं अगर सरकार चलाने के लिए बहुमत हैं तो विधायकों को रिसोर्ट में रखने की जरूरत क्या हैं।

दरसअल ख़ुद को राजनीति का जादूगर कहने वाले अशोक गहलोत भी जानते है के उनके खेमे में मौजूद कुछ विधायक पायलट का समर्थन कर सकते है। सचिन पायलट की छवि एक युवा नेता की है। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में गहलोत को चेहरा बना लड़ी कांग्रेस बुरी तरह हारी थी। जिसके बाद कांग्रेस ने राजस्थान की कमान पायलट को सौप दी थी। जानकार बताते हैं कि 2018 में राजस्थान में कांग्रेस को वापसी कराने में पायलट का बड़ा योगदान रहा हैं।

पायलट की गुज्जर और मीणा जाती के लोगो में अच्छी पकड़ है दोनों ही जातियों का कुल 16प्रतिशत वोट हैं। पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रेदश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद दोनों ही जातियों के लोग नाराज़ हैं। वही कुछ विधानसभा कमेटियों ने नाराज़गी जताते हुए पार्टी से इस्तीफ़ा भी दे दिया। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व में भी पायलट को लेकर दो गुट चुके हैं कुछ लोग पायलट की सदस्यता रद्द करना चाहते है वही कुछ पायलट से नाराज़ है मगर पायलट के बीने सूबे में सरकार चलाना मुश्किल ये भी अच्छे से जानते हैं।

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