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मध्य प्रदेश में 24 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव से पहले आज बीजेपी और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों को उस समय बड़ा झटका लगा जब सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया के बचपन के दोस्त बालेंदु शुक्ला ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में फिर से वापसी कर ली।

प्रदेश की राजनीति बालेंदु शुक्ला कभी कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते थे। राज्य के ब्राह्मण मतदाताओं पर उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है। वे 13 साल तक अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे।

बालेंदु शुक्ला पूर्व केंद्रीय मंत्री और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया के बचपन के दोस्त थे, और उन्हें बरसों से सिंधिया घराने के करीबी और भरोसेमंद लोगो मे गिना जाता हैं।

बालेंदु शुक्ला ग्वालियर जिले से विधायक रहे हैं, वे ब्राह्मणो में खासे लोकप्रिय हैं और ब्राह्मण मतदाताओं पर उनकी शुरू से ही अच्छी पकड़ रही है। बालेंदु शुक्ला के साथ ही 2018 के चुनाव में समाजवादी पार्टी से मेहगांव से चुनाव लड़े सुरेश सिंह ने भी कांग्रेस में शामिल हो गए।

बालेंदु शुक्ला ने सन 1980 से 2003 के बीच कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लगातार छह बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें से वे तीन दफा वे चुनाव जीते और विधानसभा पहुँचे। इसके इतर उन्होंने 1980 से 1998 के बीच ग्वालियर की गिर्द विधानसभा सीट( वर्तमान भितरवार सीट) से 5 चुनाव लड़े जिनमें तीन बार वो जीते और दो बार पराजित हुए। बालेंदु ने कांग्रेस के टिकट पर आखिरी चुनाव ग्वालियर विधानसभा सीट से 2003 में लड़ा था।

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस में वापसी के बाद वे ग्वालियर पूर्व विधानसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी भी हो सकते हैं।माना जा रहा है कि बालेंदु शुक्ला ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल इलाके में कम से कम 12 विधानसभाओं में ब्राह्मण मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

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