पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी के कई बड़े नेताओं ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया था सभी को पार्टी ने टिकट भी दिया पर कुछ गिने चुने लोग ही अच्छा प्रदर्शन कर पाए नतीज़े टीएमसी के पक्ष में रहें और ममता बनर्जी एक बार फ़िर सूबे की मुख्यमंत्री बने उनके मुख्यमंत्री पद के शपत लेने के बाद से ही टीएमसी से बागी होकर भाजपा में गये नेताओं के वापस पार्टी जॉइन करने के कयास लगाये जा रहें थे चुनाव से पहले जितने लोग तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए थे, वे सभी अब वापस तृणमूल कांग्रेस में लौटना चाहते हैं ममता बनर्जी के क़रीबी कहे जाने वाले मुकुल रॉय चुनाव से पहले भाजपा में चले गाए थे पर शुक्रवार को ममता बनर्जी की मौजूदगी में वापस तृणमूल में शामिल हो गये पार्टी में उनकी वापसी के पीछे अभिषेक बनर्जी कि मुख्य भूमिका मानी जा रहीं है।

मुकुल रॉय के बाद अब डोमजूर ( हावड़ा ) से पूर्व विधायक ममता सरकार में मंत्री रहें राजीब बनर्जी के भी तृणमूल में वापस आने की चर्चा तेज़ हो गई है राजीब बनर्जी भी चुनाव से ठीक पहले टीएमसी छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गये थे हालही में राजीब के बंगाल तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष से मुलाकात के बाद अब उनकी पार्टी में घर वापसी लगभग संभव मानी जा रहीं है।

हालांकि, राजीव और कुणाल दोनों ने ही किसी भी प्रकार कि राजनीतिक मुलाकात से साफ़ इंकार कर दिया सबसे पहले कुणाल घोष ने अपना बयान जारी कर कहा के ये सिर्फ़ एक शिष्टाचार मुलाक़ात थी इसमें कोई भी राजनीतिक दृष्टिकोण नहीं तलाशा जाये वही उसके ठीक बाद राजीब बनर्जी ने भी बयान जारी कर इसे महज़ एक औपचारिक मुलाकात बताया साथ ही किसी भी प्रकार कि पार्टी फेरबदल से मना कर दिया।

दरअसल मुकुल रॉय तृणमूल के पहले बड़े नेता थे जिन्होंने भाजपा का दामन थामा जिसके बाद ममता बनर्जी के कई विधायकों ओर पार्टी पदाधिकारियों ने भाजपा की सदस्यता ली राजनीति के जानकारों की माने तो तृणमूल में सेंध मारने के लिए मुकुल रॉय ही भाजपा का सबसे बड़ा तुरुप का इक्का साबित हुए उन्हीं के मध्यस्थता के कारण ही तृणमूल के कई विधायक भाजपा में शामिल हुए और अब मुकुल रॉय के वापस खेमा बदलतें ही बाकी नेताओ को भी बीजेपी में रहना खटकने लगा है ।

मुकुल रॉय और उनके समर्थकों के बीजेपी छोड़ने की बड़ी वज़ह सुवेन्दु अधिकारी को भी माना जा रहा है दरअसल सुवेन्दु अधिकारी के नंदीग्राम ममता बनर्जी को चुनाव हराते ही भाजपा में उनका कद बढ़ गया जिसके बाद मुकुल रॉय की पार्टी में पहले जैसी धमक नहीं रही अधिकारी का बढ़ते कद रॉय के लिए भविष्य में उनके लिये नकारात्मक हो सकता था।

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