चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपतिनाथ पारस के बीच विवाद थमने का नाम नही ले रहा है लोकसभा में पार्टी दल के नेता के बाद अब पशुपतिनाथ ख़ेमे ने चिराग़ को लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी हटा दिया है पारस लोजपा के संस्थापक स्वर्गीय रामविलास पासवान के छोटे भाई है पारस रिश्ते में चिराग पासवान के चाचा लगते हैं। पशुपति पारस के नेतृत्व में पार्टी के बागी सांसदों की बैठक में यह फैसला हुआ है के चिराग़ अब पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे।

लोजपा नेता सूरजभान को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले बीती शाम चिराग पासवान से पार्टी की एक और पद छीन ली गई थी। लोकसभा में चिराग पासवान लोजपा संसदीय दल के नेता थे। इस पद से भी पशुपति पारस के नेतृत्व में बागी सांसदों ने मिलकर चिराग पासवान की छुट्टी कर दी। बता दें की लोकसभा में लोजपा के कुल छह सांसद हैं। जिनमें एक चिराग पासवान हैं। दूसरे पशुपति कुमार पारस। इसके अलावा अन्य चार सांसद पशुपति कुमार पारस के समर्थन में हैं।

चिराग ने बागी सांसदों को पार्टी से निकाला:

इतना ही नहीं वहीं दूसरी ओर चिराग पासवान ने आज लोजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। इस बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पांचों बागी सांसदों को पार्टी से निकाल दिया। पशुपति कुमार पारस, बीना देवी, एम ए कैसर, चंदन सिंह और प्रिंस राज इन पांचों सांसदों को लोजपा से बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर लोजपा ने एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की है।

रामविलास पासवान की बनाई हुई लोक जनशक्ति पार्टी पारिवारिक पचड़े के फेर में दो फाड़ हो चुकी है। एक ओर पांच सांसदों के समर्थन वाले चाचा पशुपति कुमार पारस चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटा रहे हैं। तो दूसरी ओर चिराग पासवान राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर चाचा पारस गुट को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं।

चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस दोनों ही अपने को असली लोजपा बताने में लगे हैं। वास्तव में लोजपा दो धड़ों में साफतौर पर टूट चुकी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी चिराग के साथ है तो वहीं 6 में से 5 सांसद पशुपति के साथ। अब यह सियासी लड़ाई असली लोजपा साबित करने की ओर चल पड़ी है। देखना होगा कि ये मसला अभी और कितने गुलाटियां मारता है?

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