भारत में महिलाओं की सुरक्षा एक चिंता का विषय रहा है। दशकों से कई सरकारें महिला सुरक्षा के नाम पर महज नारे ही गढ़ते रही हैं। समाज के स्तर पर भी इसमें कोई सुधार होता नहीं दिखता है। महिलाएं आज भी अपनी रक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। इन तमाम बहसों के बीच गुरुवार यानी 10 जून को उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्या मीना कुमारी (Meena Kumari) का बयान सामने आया है।

उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्या मीना कुमारी का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों की मूल वजह मोबाइल है। मोबाइल के इस्तेमाल के चलते लड़कियां ‘बिगड़’ रही हैं। मीना कुमारी का कहना है कि आज अगर बेटियां ‘बिगड़’ गई हैं तो उसके लिए उनकी माताएं ही जिम्मेदार हैं।

मीना कुमारी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ पहुंची थीं। यही उन्होंने कहा कि “महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराधों पर समाज को खुद गंभीर होना पड़ेगा। ऐसे मामलों में मोबाइल एक बड़ी समस्या बन कर आया है, लड़कियां घंटों मोबाइल पर बात करती हैं। लड़कों के साथ उठती बैठती हैं।” मीना कुमारी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने आगे कहा कि “लड़कियों के मोबाइल भी चेक नहीं किये जाते। घरवालों को पता नहीं होता और फिर मोबाइल से बात करते-करते लड़कों के साथ वह भाग जाती हैं।”

हो रही है आलोचना:


सोशल मीडिया पर मीना कुमारी के इस बेतुके बयान की खूब आलोचना हो रही है। लोग उनकी मानसिकता पर भी सवाल उठा रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये बयान अपराधों को कम करने के बजाए बढ़ाने वाला है। सवाल है कि आखिर कब तक लड़कियों पर इस तरह के पाबंदियों की वकालत होती रहेगी?

ये बयान किसी साधारण व्यक्ति ने नहीं बल्कि एक जिम्मेदार पद पर बैठी अधिकारी की है। वो भी महिला आयोग की सदस्या। महिलाओं की रक्षा और अधिकारों के हिमायती महिला आयोग के सदस्य का ऐसा बयान देना सवाल खड़े करता है?

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