अपनी-नकाबिलियात-का-ज़िम्मा-अस्पतालों-पर-क्यों-दाल-रहें-हैं-केजरीवाल-thesecularindia

दिल्ली में कोरोना विषाणु संक्रमण का आकड़ा छब्बीस हज़ार के पार पहुंच गया हैं। पिछले चौबीस घंटे में कोरोना के नए 1331 मामले सामने आए हैं। वहीं कोरोना से अब तक दिल्ली में 708 लोगों की जान भी जा चुकी हैं।कोरोना संक्रमण के बढ़ते आकड़ो के साथ अब दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खुलने लगीं हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां अस्पताल में बेड़ ना मिलने की वज़ह से मरीज़ो की जान गई हैं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 7 अप्रैल को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली में तीस हज़ार बेड की व्यवस्था करने का दावा किया था। मगर दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था कोरोना के एक्टिव मरीजों का आकड़ा सोला हज़ार पहुंचते ही जवाब दे गई हैं। दिल्ली के कई इलाकों से कोरोना मरीज़ो को बेड़ ना मिलने की खबरें सामने आई थी। जिसके बाद दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक एप्प जारी किया था जिससे आप सभी अस्पतालों में खाली बेड़ो को संख्या जान सकते हैं।

सरकार के एप्प जारी करने के बाद कुछ मीडिया हॉउस ने एप्प में दिखाये गए अस्पतालों की पड़ताल करी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार एप्प में चिन्हित सात अस्पतालों में जब दैनिक भास्कर के संवादाता पहुंचे तो सात में से तीन अस्पतालों ने बेड़ नहीं हैं जबकि चार अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। दैनिक भास्कर के अलावा एनडीटीवी ने भी एक ऐसी ही रिपोर्ट दिखाई थी। जिसमें दिल्ली सरकार के एप्प में दिए गए अस्पतालों ने बेड़ देने से साफ़ मन कर दिया। सभी कहना था के हमारे अस्पताल में कोई बेड़ ख़ाली नहीं हैं।

मीडिया के रिपोर्ट चलाने के बाद केजरीवाल सरकार की आँख खुली। देर से जागी सरकार ने उठते ही सरकार की सारी नकाबिलियात का जिम्मा अस्पतालों पर ड़ाल दिया और अस्पतालों को फ़टकार लगाते हुए उनके खिलाफ़ सख्त कारवाई करने की बात कही। जिसके बाद दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने भी अरविंद केजरीवाल पर हमला बोल दिया हैं। एसोसिएशन ने एक बयान जारी कर कहाँ ‘ दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन सीएम केजरीवाल द्वारा अस्पतालों को बेड़ और टेस्ट के लिए धमकाए जाने की कड़ी निंदा करता हैं पिछले दो महीने से डॉक्टर निस्वार्थ भाव से मरीज़ो का ईलाज़ कर रहे हैं पर उनकी तारीफ़ तो दूर इस तरह के बयान से उनका अपमान करा जा रहा हैं।

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पर टेस्ट नियमों का उलंघन करने के आरोप में शिकायत दर्ज़ कराई गई हैं। 7 अप्रैल को तीस हज़ार बेड़ का दावा करने वाली सरकार आज दो महीने बाद मात्र 6600 बेड़ का इंतज़ाम कर पाई हैं। अगर ये सरकार की नाकामयाबी नही तो और क्या हैं।

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