कोरोना एक ऐसी लाईलाज बीमारी जिसने पूरे विश्व में अपनी सत्ता के चादर पसारे हुए हैं।और कोई भी वैक्सीन मजबूत विपक्ष के तौर पर इसके सामने टिकने में असक्षम हैं।पूरे विश्व में कोरोना के संक्रमित मरीज़ो की संख्या बढ़ती जा रही हैं।विश्व में 75 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं वहीं 4.5 लाख से अधिक लोगो को इस बीमारी ने अपना शिकार बना दिया हैं।भारत में भी कोरोना का कहर जमकर टूट रहा हैं।देश मे कोरोना की रफ्तार बुलेट से भी तेज भाग रही हैं।विश्व में भारत कोरोना से संक्रमित मरीज़ो की संख्या में चौथे पायदान पर हैं।

चका-चौंध रहने वाली राजधानी दिल्ली की चमक भी आजकल फीकी पड़ गई हैं,कोरोना के चलते सरपट भगाती राजधानी पर ब्रेक लग गया हैं। दिल्ली में कोरोना से संक्रमित लोग बढते जा रहे हैं, दिल्ली में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 47 हज़ार के पार हैं वहीं मरने वाले लोगो का आंकड़ा 1904 पहुँच गया हैं।दिल्ली की हालत इस महामारी में बद से बदत्तर हो गयी हैं।पहले राजधानी के अस्पतालों में बेड पाने के लिए मरीज तरस्ते थे और अब कोरोना से जान गवांकर शमशान घाट में जगह पाने के लिए।दिल्ली में कुल 7 शमशान घाट और 2 कब्रिस्तान हैं और हर जगह लाशों  का ढेर लगा हुआ हैं।हालात इतने नाजुक हैं लोगों को अंतिम संस्कार करने के लिए टिकट कटाना पड़ रहा हैं।पिछले 24 घण्टो में दिल्ली में 2414 नए केस सामने आए हैं।

वही दूसरी तरफ इस संकट काल में भी सत्ता के गलियारों में राजनीति का तड़का मारने वाले राजनेता पीछे नहीं हटे,केंद्र व राज्य आपस में एक दूसरे की खींचतान में लगी हुई हैं, केंद्र सरकार राज्य सरकार की नीतियों पर आरोप थोपती हैं तो राज्य सरकार कहती है केंद्र काम नहीं करने देती, इस बुरे वक्त में साथ चलने के बजाय राजनीतिक पार्टियों को सत्ता की रोटी सेकने से मन नहीं कतरा रहा हैं।सब अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में जनता को पीस रहे हैं।देश की हालत पहले से ही इस कोरोना काल में खस्ता पड़ी हैं और उप्पर से सरकार व प्रशासन काम करने के बजाय  अपनी नाकामियों को छुपा रही हैं।

देश में सबसे अधिक महाराष्ट्र राज्य में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या हैं।महाराष्ट्र में कोरोना से संक्रमित मरीज़ो की संख्या 1 लाख के पार पहुँच चूंकि हैं और 5651लोगों को इस महामारी के चलते मौत से हाथ धोना पड़ा।वही देश में  3 लाख 66 हज़ार मरीज इसके आगोश में आ गए हैं जबकि 12237 लोग इस बीमारी से अपनी जान गवां बैठे हैं।अगर जल्द ही उचित व नीतियों को सरकार भूपटल पर नहीं उतारती हैं तो इन आँकडो में इज़ाफ़ा देखने को मिल सकता हैं।और लोग अपना भविष्य देखने के लिए महरूम हो जाएंगे।

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