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मध्यप्रदेश के राज्यपाल और वरिष्ट भाजपा नेता लालजी टंडन का मंगलवार सुबह को निधन हो गया। 85 वर्ष के लालजी टंडन बीते कई दिनों से बीमार थे। वे लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे।
लालजी टंडन की छवि एक बड़े नेता की रही। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं कि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती उन्हें राखी बांधती थीं। बात उन दिनों की हैं जब उत्तर प्रदेश के चर्चित गेस्ट हाउस कांड के समय लालजी टंडन ने मायावती की जान बचाई थी। यही कारण है कि बहनजी उन्हें अपना भाई मान और तब से वे उनको राखी बांधती थीं। गौर करने वाली बात ये है कि 90 के दशक में जब उत्तर प्रदेश में भाजपा और बसपा की सांंझी सरकार बनी थी, तब इसमें लालजी टंडन का अहम योगदान उस वक़्त बहुत अहम माना गया था। बीजेपी और बसपा को साथ लाने का साफ श्रेय लालजी को दिया गया था।

जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था। चर्चा थी कि पीएम मोदी उत्तर प्रदेश की किसी सीट से लड़ सकते हैं। तब लालजी टंडन ने कहा था कि वे नरेंद्र मोदी के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं। बाद में राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़े और नरेंद्र मोदी वाराणसी से जीतकर प्रधानमंत्री बने थे।

लालजी टंडन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भी बहुत करीबी रहे। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दोनों ने करीब 50 वर्षों तक साथ काम किया। लालजी टंडन कहते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी मेरे बड़े भाई और पिता हैं। लालजी टंडन कोई भी बड़ा काम अटलजी के आशीर्वाद से ही शुरू करते थे। अटल के राजनीति से संन्यास लेने के बाद उनके संसदीय क्षेत्र लखनऊ से 2009 में लालजी टंडन ही चुनाव लड़े और जीतकर संसद पहुँचे।

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