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मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल मोदी 2.0 के एक वर्ष पूरा होना पर अपनी उपलब्धियों का महिमामंडन कर रहें मंत्रियों और सभी सांसदों में से शायद किसी ने भी श्रमिक स्पेशल ट्रेन में हुई 80 मौतों पर संवेदना प्रकट करना तक ज़रूरी नहीं समझा।

भारतीय रेलवे ने प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए 1 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू किया था। जिसके जरिये रेलवे अब तक लग-भग 50 लाख प्रवासियों को घर पहुंचा चुका हैं। जिसमें से 80 लोगों की दुखद मौत ताप्ती गर्मी में ट्रैन के लंबे सफ़र में खाना पानी ना मिलने की वज़ह से हो गई। पिछले दिनों श्रमिक स्पेशल ट्रैन के 48 घंटे देरी और रास्ता भटक जाने की खबरें भी आई थी।

नियमित समय से अपने गंतव्य तक पहुंचने में हुई देरी पर रेलवे ने अपना बचाव करते हुए रेलवे ने अपना पक्ष रखा रेलवे ने कहा ‘ट्रैन का तय मार्ग प्रवासी मजदूरों के फायदे के लिए बढ़ाया या घटाया जा सकता हैं। भला 48 घंटे का सफ़र 72 घंटे में तय करने से मजदूरों को क्या लाभ होगा इसका जवाब ख़ुद रेलवे के पास भी नहीं हैं।

बीते दिनों बिहार के पटना रेलवे स्टेशन का एक वीडियो सामने आया। वीडियो में एक ढाई साल का बच्चा अपनी माँ के शव के पास बैठा खेल रहा है। उस ढाई साल के बच्चें को शायद ये अंदाज़ा भी नही होगा के माँ अब कभी नहीं उठेंगी। महिला अहमदाबाद से श्रमिक टैन में अपने घर बिहार आ रहीं थी। ट्रैन में खाना पानी ना मिलने की वज़ह से उसकी हालात ख़राब हो गई जिसके बाद महिला की ट्रैन में ही मौत हो गई। भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में जहाँ हर एक जान का महत्त्व हैं वहा इन 80 मौतों का जिम्मेदार आख़िर कौन है।

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